vikram
21 जून 2006 मेरा जन्म हुआ
21 जून 2066 को में अपने लिए मर जाऊंगा
अंतर्मुखी
“आपको इस किताब में,, मैं मिलूंगा।”
मैं एक जादूगर, माइंड रीडर, हिप्नोटिस्ट, ड्रॉइंग आर्टिस्ट…और अब एक किताब लेखक, …?
आज 21 जून 2006 दोपहर के 3 बजकर 15 मिनट। गांव ……?….. के एक छोटे से घर के कमरे में पहली बार एक बच्चे के रोने की आवाज़। वह कोई और नहीं… मैं हूँ | .…“to be continued”
2021। समय ! 12वीं के बाद घर में अकेला में, मेरे साथ रहने लगा ! पर धीरे-धीरे जीने से ज्यादा मरने का डर लग रहा है क्या करूं तब मैंने मेरे लिए ! क्या यार विक्रम क्या हुआ मैं हूं ना तेरे साथ डर मत ! तब से मेरी दो पहचान, मैं जिंदगी भर सीखता रहूंगा और 60 साल की उम्र का होते ही मर जाऊंगा, दूसरा – मेरा विक्रम।………“to be continued”

में समय हु

मैं तुम्हारा आज का दिन ! एक काल्पनिक काल न शुरुआत मेरा अंत हे न अंत मेरी शुरुआत ! मैं जन्मा तुम्हारे जन्म से पहले मैं मरूंगा तुम्हारे मरने के बाद ! मैं ही तुम्हारा अतीत बना मैं ही तुम्हारा भविष्य बनूंगा पर वर्तमान नहीं ! तुम सोचते हो तुम जी रहे हो पर ले जा रहा हूँ मौत की तरफ पर सच से अंजान हो क्योंकि मैंने ही पैदा किया मैं ही मार दूंगा ! मैं ही तुम्हारा जन्म हूं मैं ही तुम्हारी मौत ! तुम जो अभी बैठकर मुझे पढ़ रहे हो… जो वक्त तुम्हें लग रहा है, वह मैं ही हूँ। में तुम्हें तुम्हारे ही बीते हुए कल से मिलवाता हूँ।तो चले आज से कुछ साल पीछे जब मुझे तुम्हारे लिए बनाया गया…. मेरे विक्रम ने
– महत्वपूर्ण बिंदु-मैं समय हूं –
1 – मैं तुम्हारा आज का दिन तो अभी तुम ना इसे आगे पढ़ सकती हो –
2 coming soon
3 – मैं आप का काल आप सब सबसे नीचे से पढ़ सकते हो
31 दिसंबर 2023
रात के 9:00 बजे ! कमरे के अंदर सफेद लाइट की रोशनी ! अलमारी के सामने खुली डायरी, नजर खाली पन्नों पर, और हाथ में पेन लेकर फर्श पर बैठा बैठा लिख रहा आज का दिन ! सुबह पलंग पर से 5 बजे अलार्म की आवाज ………………… दीवार कूद कर अंदर आया मैदान में पड़ी लकड़ीया , इकट्ठा कर प्लास्टिक से आग जलाकर बैठ गया ! कुछ देर में ही सूरज की हल्की रोशनी से मैदान दिखने लगा तो उठा ! दौड़ने लगा मैदान में एक राउंड दो राउंड ……………………………. नींद ” जब आंख खुली पलंग पर दीवार के सारे बैठ गया ! बाहर देखा कुछ ही देर में रात भी होने वाली हैं ! कमरे का दरवाजा खोल सामने वाली छत पर चला आया ! दीवार पर लेट कर दोनों हाथ सीर के नीचे ऊपर खुले आसमान की ओर देखने लगा, नीले आसमान में जगह-जगह सफेद रोशनी में तारे, मेरे ऊपर ही ! पक्षी उड़ रहे हवा से बादल भी धीरे-धीरे बिखरने लगे ! देखते ही देखते आसमान नीले से काला हो गया तारे भी दिखने लगे ! ठंड भी लगने लगी इसलिए नीचे आ गया………………………………….रात के 9:00 बजते ही घर के सबसे अंदर वाले कमरे में जाकर अलमारी के नीचे से चाबी निकाली लॉक खोल डायरी फर्श पर रख कर बैठ गया और आज के दिन को लिख दिया ! और सोचने लगा कल से नया साल इस साल भी अपनी जादू की दुनिया को बड़ा करना यानी और बड़ा जादूगर ! और इस साल तो पक्का सुधर जाऊंगा ? पता नहीं क्यों लेकिन इस साल मुझे एनीमेशन सीखने के साथ-साथ बांसुरी वह तेलुगू भी ! लिखने के बाद पेन डायरी के बीच में रखा अलमारी लॉक कर चाबी वापस अलमारी के नीचे छुपा दी ! कमरे से बाहर निकाला ! सब घर वाले टीवी देख रहे मैं ऊपर चला आया ! कमरे में अंधेरा फोन की रोशनी पलंग पर बैठा बैठा 5:10 5:20 5:30 5:40 5:50 6 बजे अलार्म करके ! बिस्तर ओढ़ कर पलंग पर उल्टा लेट गया आंखें बंद कर उसे इमेजिन करने के लिए पर आंखें बंद करते ही बीच में लाना की इमेजे ! बार-बार बीच-बीच में लाना की इमेज ! आंख खुली ! शांत कमरे में इधर-उधर देखने पर सिर्फ अंधेरा ! फिर आंखें बंद कर इमेजिन करने लगा पर फिर भी लाना की एडल्ट इमेजे ! इमेजिनेशन छोड़ ! ओर पलंग पर उल्टा सो गया ! आंखें बंद सांसों की आवाज ! एक साइड मुंह करके सो गया ! फिर सीधा फिर उल्टा पलंग पर इधर-उधर करवटें बदलते रहा आंखें खोल दी नींद नहीं आ रही शायद मुझे दिन में नहीं सोना चाहिए था ! दीवार के सहारे पलंग पर बैठ गया ! फोन चालू किया 1:32 ! नींद आ नहीं रही क्या करूं अ….. इमेजिनेशन ! उसके अंदर एक और इमेज के आते ही इमेजिनेशन करने लगा एक खींचकर थप्पड़ यार विक्रम ऐसा किया ना वह गुस्सा करेगी, वह अकेली, चल छोड़ वापस फोन देखा तो 2:00 बज गए ! पलंग पर आंखें खोल सीधा लेट कर अपने आप से बातें ! यार विक्रम कोई नया इमेजिनेशन या आइडिया ! शांत ! कुछ देर बाद डायरी ! क्यों ना ये डायरी अभी उसके हाथ में हो और डायरी में देखकर हंस रही हो ! मैं खुश ! यार विक्रम यह कुछ सोचा ना ! फिर से आंखें बंद ! अपनी अंदर की विजुलाइजेशन दुनिया में देख रहा कि कैसे इस गांव में एक घर के कमरे में अकेली सामने खूली डायरी ! पहले कमरे में इधर-उधर देखने लगी ! कमरे के बाहर से आवाज सुनाई दे रही पर वह तो डायरी में देखकर बस मुझे ही पढ़े जा रही और कैसे में उसे देख रहा ! ध्यान डायरी में, शांत चेहरा, बीच-बीच में पलकों का झपकना, और इन शब्दों पर चलती हुई नजर और नजरों में ये शब्द इन शब्दों की अंदर आवाज की कैसे आगे पढ़ती हे ! यार विक्रम अब बस कर रात के 3 बजने वाले हे चल अभी सो जा ! फिर क्या नींद
2024
1 जनवरी सर्दी !सुबह के 5 बजे कमरे में अलार्म की आवाज पर पलंग पर लेटा लेटा ही हाथ से अलार्म बंद कर दिया ! 10 मिनट बाद वही आवाज 20 मिनट बाद फिर वही 30 मिनट बाद फिर वही थोड़ा और सोने के लिए बंद कर देता ! 5:50 पर अलार्म की आवाज से परेशान होकर उठा और पलंग पर बैठ गया ! कुछ देर बाद 6:30 बजे घर का दरवाजा खोला ! बाहर गली में अंधेरा! ठंड भी बहुत ! सीढ़ियों पर खड़ा-खड़ा सोचने लगा ! क्या करूं जाऊं कि नहीं जाऊं ! वापस ऊपर आकर कमरे का दरवाजा बंद कर सो गया कुछ घंटे बाद कमरे के बाहर से मांमां के लड़के की आवाज !…………………………जमीन पर इधर-उधर देख कोयले का टुकड़ा दिखते ही लाइट के खंबे पर कुछ लिखकर अंदर चला आया! मैदान में आते ही सब मेरे सामने खड़े होकर मुझे देखकर कहने लगे जादू जादू ! …………….दोपहर का समय घर की ओर सड़क पर चलते-चलते पीछे से लड़कों की आवाज की यह जादू कैसे किया ! पर उसका घर आते ही! बाहर उसके पापा बैठे सड़क की और मुंह करके मैं उनके पीछे देखने लगा घर का दरवाजा खुला ! आसमानी फ्रॉक आंखों में काजल शांत चेहरा ! और मेरी और देखती हुई आकर अपने पापा के पीछे खड़ी हो गई ! पर उसके पापा भी मुझे ही देख रहे हैं इसलिए सामने घर की तरफ मुंह करके चलने लगा ! अभी भी ध्यान में वही घर आया…………. 9:00 बजते ही डायरी लेकर बैठ गया आज के दिन को लिख रहा था कि तभी क्यों यार विक्रम इस साल की डायरी देना जरूरी है 2023 की भी तो डायरी इस हफ्ते उसे दे सकता हूं ! ऐसा मन में आते ही कल का दिन जल्दी से आ जाए ! पर पहले कल 2023 की पूरी डायरी पढ़ूंगा ! फिर वापस डायरी अलमारी में रखकर लॉक करके सीढ़ियों से ऊपर जाकर सिर के पास फोन रखकर एक साइड लेट कर सो गया “नींद”।
22 जनवरी …“coming soon” फरवरी……. मार्च…..अप्रैल…….2025…….. जनवरी……..2026….
आगे पढ़ने के लिए…..…“to be continued”
में समय हु
आप का आज का दिन,
मैं यह साबित कर सकता हूं ,कि आप मूर्ख हैं ।आज और अभी देखो ,क्या भगवान है? यदि हां ,पर यह तो आप ने माना हुआ है। इसका मतलब क्या भगवान नहीं है? पर यह भी तो आप ने माना हुआ है ।पर यह दोनों ही मन की मान्यताएं है।मैंने तो आप के दोनों रास्ते बंद कर दिए । अब आप क्या करोगे ?
अब मैं यह भी साबित कर सकता हूं । आप मरे हुए भी हैं
आपके पिता कहते हैं मैं तेरा पिता हूं, आप मान लेते हो।
आपकी मां कहती है मैं तेरी मां हूं, आप मान लेते हो।
आपका भाई कहता है मैं तेरा भाई हूं, आप मान लेते हो।
आपकी बहन कहती मैं तेरी बहन हूं, आप मान लेते हो।
आप इस जाति के हैं और आप ने मान लिया। आप का यह धर्म है, आप ने यह भी मान लिया।
साबित कर दिया ना, कि आप सब मरे हुए हैं।आप तो बच्चे थे, आपको कैसे पता कि यह सब मेरे हैं।चल छोड़ो,,,अब मैं यह भी साबित कर सकता हूं कि आप है ही नहीं……………….? अब आपने यह लिखा भी मान लिया ना, क्या पता यह सब भी झूठ लिखा हो।
देखो, आपके मम्मी-पापा को उनके, मम्मी-पापा ने कहा वह भी मान गए। फिर उनको उनके मम्मी-पापा ने कहा और वह भी मान गए।फिर उनको उनके मम्मी-पापा ने कहा और वह भी मान गए।फिर उनको उनके मम्मी-पापा ने कहा और वह भी मान गए।………………………………………………………………………..To be cantinued
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